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गुरुवार, 13 सितंबर 2018


ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप Read More Articles On Heart Health In Hindi जानें क्या है कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग टेस्ट और कैसे कंट्रोल करें बढ़ता कोलेस्ट्रॉल Aug 11, 2018 QUICK BITES: कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग टेस्ट से होती है शरीर में कोलेस्ट्रॉल की जांच।बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल दिल की जानलेवा बीमारियों को बढ़ावा देता है।20 साल की उम्र में पहली बार कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग टेस्ट करवाना चाहिए। आप जानते हैं कि बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल दिल की जानलेवा बीमारियों को बढ़ावा देता है। हालांकि कोलेस्ट्रॉल दो तरह का होता है, गुड कोलेस्ट्रॉल या एचडीएल और बैड कोलेस्ट्रॉल या एलडीएल। इनमें से गुड कोलेस्ट्रॉल आपके शरीर के लिए फायदेमंद है जबकि बैड कोलेस्ट्रॉल से शरीर को कई तरह के रोगों का खतरा रहता है। कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग टेस्ट, ब्लड में कोलेस्ट्रॉल के स्तर की जांच है। इस टेस्ट में ब्लड में मौजूद एचडीएल और एलडीएल दोनों का स्तर जांचा जाता है। आइये आपको बताते हैं क्या है कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग टेस्ट और कैसे कंट्रोल कर सकते हैं आप अपना कोलेस्ट्रॉल। क्या है कोलेट्रॉल स्क्रीनिंग टेस्ट कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग टेस्ट में रक्त में एचडीएल और एलडीएल दोनों का स्तर जांचा जाता है। 20 साल की उम्र में पहली बार कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग टेस्ट करवाना अच्‍छा रहता है। इसके बाद हर पांच साल में एक बार यह टेस्ट करवाने से आप कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर पर नजर रख सकते हैं। हालांकि, इसके बाद आपको कितने समय बाद जांच करवानी यह जांच के स्‍तर पर निर्भर करता है। अगर रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य से अधिक है या आपके परिवार में दिल की बीमारियों का पारिवारिक इतिहास रहा है तो डॉक्टर हर 2 या 6 माह में जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। इसे भी पढ़ें:- अचानक बढ़ जाती है दिल की धड़कन तो हो सकती है ये खतरनाक बीमारी क्यों जरूरी है कोलेस्ट्रॉल की जांच कोलेस्ट्रॉल लिवर द्वारा उत्पन्न की जाने वाली वसा होती है। हमारा शरीर सही प्रकार से काम करता रहे, इसके लिए कोलेस्‍ट्रॉल का होना जरूरी है। शरीर की हर कोशिका के जीवन के लिए कोलेस्‍ट्रॉल का होना आवश्‍यक है। क्‍त में कोलेस्‍ट्रॉल की अधिक मात्रा शरीर को तमाम प्रकार की बीमारियां दे सकती है। दिल की बीमारियों की बड़ी वजह कोलेस्‍ट्रॉल का स्‍तर सामान्‍य से अधिक होना है। इसलिए समय-समय पर कोलेस्ट्रॉल की जांच द्वारा आप जान सकते हैं कि कहीं आपको दिल की बीमारी का खतरा तो नहीं है। इसके अलावा इस टेस्ट के द्वारा आप ये भी जान सकते हैं कि कब आपको कोलेस्ट्रॉल को कम करने की जरूरत है। कितना होना चाहिए आपका कोलेस्ट्रॉल इंसान की सेहत कैसी होगी, यह बात काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि उसके रक्‍त में कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा कितनी है। रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर 3.6 मिलिमोल्स प्रति लिटर से 7.8 मिलिमोल्स प्रति लिटर के बीच होता है। 6 मिलिमोल्स प्रति लिटर कोलेस्ट्रॉल को उच्च कोलेस्‍ट्रॉल की श्रेणी में रखा जाता है। इन हालात में धमनियों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। 7.8 मिलिमोल्स प्रति लीटर से ज्यादा कोलेस्ट्रॉल को अत्यधिक उच्च कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। आप इस स्थिति में कभी नहीं पहुंचना चाहेंगे। इन हालात में आपको दिल का दौरा पड़ने और स्‍ट्रोक का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। इसे भी पढ़ें:- जानिये कितना होना चाहिए आपका कोलेस्ट्रॉल और कब शुरू होती है इससे परेशानी कैसे कम करें बढ़ता कोलेस्ट्रॉल मोटापे को जल्द करें कंट्रोल रोजाना 30 मिनट करें एक्सरसाइज साइकिलिंग, स्विमिंग, रनिंग या डांसिंग जैसे शौक रखें। ट्रांस फैट वाले फूड्स से रहें दूर। कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं का समय पर करें सेवन। ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप Read More Articles On Heart Health in Hindi शरीर में होने वाले ये बदलाव ह्रदय रोग के हैं संकेत Aug 09, 2018 QUICK BITES: 'हृदय' मनुष्‍य के शरीर का महत्त्वपूर्ण अंग होता है। यह छाती के बीच, थोड़ी सी बाईं ओर स्थित होता है। हृदय की मांसपेशिया जीवंत होती है 'हृदय' मनुष्‍य के शरीर का महत्त्वपूर्ण अंग होता है। यह छाती के बीच, थोड़ी सी बाईं ओर स्थित होता है। हृदय की मांसपेशिया जीवंत होती है और उन्हें जिन्दा रहने के लिए आहार और ऑक्सीजन की जरूरत होती है। जब एक या ज्यादा आर्टरी रुक जाती है तो हृदय की कुछ मांसपेशियों को आहार और ऑक्सीजन नही मिल पाती। इस स्थिति को हार्ट अटैक यानी दिल का दौरा कहा जाता है। इस सिलसिले में कुछ लोगो को भ्रम हो सकता है कि दिल से संबंधित और भी समस्याएं होती हैं जैसे- हार्ट वॉल्व की समस्या, कंजीनाइटल हार्ट प्रॉब्लम आदि, और जब हम दिल की बीमारियों की बात करते हैं तो आमतौर पर इन्हें शामिल नही किया जाता लेकिन यह समस्याएं भी हृदय रोग से सम्बंधित होती है। कार्डियो वस्क्युलर डिजीज के कारण कार्डियो वस्क्युलर डिजीज के ज्यादातर मामलों का मुख्य कारण अथीरोमा कही जाने वाली वसा धमनियों के अंदर जम जाती है। समय के साथ-साथ ये सतह बढ़ी होती जाती है और खून के बहाव में रूकावट होने लगती है और एंजाइना का दर्द होने बन जाता है। ऐसा अधिकतर तब होता है जब इस सतह पर खून का थक्का बन जाता है। ऐसा होने पर हृदय की मांसपेशी के एक हिस्से में अचानक खून की कमी हो जाती है और वह क्षतिग्रस्त हो जाता है। इस अवस्था को ही हार्ट अटैक कहते हैं। अगर ये क्षति सीमित हो तो हृदय अपनी पहली वाली अवस्था में लौट सकता है लेकिन यदि नुकसान अधिक हो तो मौत भी हो सकती है। जन्मजात हृदय की समस्याओं वाले कई व्यक्तियों में बहुत ही कम या कोई लक्षण नहीं पाये जाते। लेकिन कुछ गंभीर मामलों में लक्षण दिखाई देते हैं, खासतौर पर नवजात शिशुओं में यह प्रत्यक्ष होते हैं। इन लक्षणों में सामान्यतः तेजी से सांस लेना, त्वचा, होंठ और उंगलियों के नाखूनों में नीलापन, थकान और खून का संचार कम होना शामिल हैं। दिल के दौरे के लक्षणों में व्यायाम के साथ थकान शामिल है। सांस रोकने में तकलीफ, रक्त जमना और फेफड़ों में द्रव जमा होना तथा पैरों, टखनों और टांगो में द्रव जमा होना। जब तक बच्चा गर्भाशय में रहता है या जन्म के तुरंत बाद तक गंभीर हृदय की खराबी के लक्षण साधारणतः पहचान में आ जाते हैं। लेकिन कुछ मामलों में यह तब तक पहचान में नहीं आते जब तक कि बच्चा बड़ा नहीं हो जाता। ह्रदय रोगों के कुछ खास लक्षण अचानक सीने में दर्द दिल का दौरा पड़ने का संकेत हो सकता है, लेकिन अन्य चेतावनी के संकेत भी काफी मामलों में प्रत्यक्ष होते हैं। आपको एक या फिर दोनो हाथों, कमर, गर्दन, जबड़े या फिर पेट में दर्द और बेचैनी महसूस हो सकती है। आपको सांस की तकलीफ, ठंडा पसीना आना, मतली या चक्कर जैसे लक्षण हो सकते हैं। आपको व्यायाम या अन्य शारीरिक श्रम के दौरान सीने में दर्द हो सकता है जिसे एनजाइना कहते हैं। जो कि जीर्ण कोरोनरी धमनी की बीमारी (सी ए डी) के आम लक्षण हैं। लगातार सांस टूटने की अत्यधिक तीव्र तकलीफ दिल के दौरे की चेतावनी है। लेकिन हो सकता है यह अन्य हृदय की समस्याओं का संकेत हों। ह्रदय रोगों के कुछ अन्य लक्षण सीने में दर्द (एनजाइना) सांस की तकलीफ दर्द, सुन्नता, कमजोरी या पैर या हाथों का ठंडा पडना आदि। इसे भी पढ़ें: सोते वक्त करें ये 2 काम, कभी नहीं पड़ेंगे बीमार असामान्य दिल की धड़कन की वजह से दिल की बीमारी के लक्षण ह्रदय की तेज धड़कन धीमी गति से दिल का धड़कन सीने में दर्द सांस की तकलीफ चक्कर आना बेहोशी का अनुभव होना इसे भी पढ़ें: हार्ट अटैक से दूर रखती हैं आपकी ये 7 अच्‍छी आदतें ह्रदय के संक्रमण की वजह से हृदय रोग लक्षण बुखार सांस की तकलीफ कमजोरी या थकान आपके पैरों के या पेट में सूजन आपके दिल की धडकन की ताल में परिवर्तन लगातार या सूखी खांसी त्वचा पर चकत्ते इसे भी पढ़ें: ब्‍लड प्रेशर कम होना सेप्टिक शॉक के हैं संकेत, ऐसे करें बचाव यह ह्रदय रोगों के कुछ संभावित लक्षण हैं लेकिन किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पूर्व एक बार डॉक्टर से संपर्क अवश्य करें। ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप Read More Articles On Heart Health In Hindi दिल को रखना है लंबे समय तक स्वस्थ, तो याद रखिये ये 7 बातें Aug 09, 2018 QUICK BITES: नियमित व्‍यायाम और स्‍वस्‍थ खान-पान के जरिये ही दिल को स्‍वस्‍थ रखा जा सकता है।ऐसे आहार का सेवन कीजिए जिसमें मोनोसैचुरेटेड और पॉलीसैचुरेटेड फैट हो।ब्लड प्रेशर दिल की परेशानियों की बड़ी वजह है। दिल शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। आजकल अस्वस्थ खान-पान की वजह से बहुत सारे लोगों को कम उम्र में ही दिल की बीमारियां हो रही हैं। दिल की बीमारियां इसलिए गंभीर मानी जाती हैं कि इनमें रोगी को अक्सर संभलने और रोग के निदान का समय नहीं मिलता है। इन बीमारियों में हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर, हार्ट ब्लॉक आदि प्रमुख हैं। दिल की ज्यादातर बीमारियों से बचा जा सकता है अगर कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें। आइये जानते हैं कि किन बातों को अपनाकर आप अपने दिल को रख सकते हैं लंबे समय तक स्वस्थ। जीवनशैली बदलें नियमित व्‍यायाम और स्‍वस्‍थ खान-पान के जरिये ही दिल को स्‍वस्‍थ रखा जा सकता है। ऐसे आहार का सेवन कीजिए जिसमें मोनोसैचुरेटेड और पॉलीसैचुरेटेड फैट हो, यह शरीर एलडीएल यानी बुरे कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा को कम कर दिल को स्‍वस्‍थ रखता है। खानपान के अलावा नियमित रूप से व्‍यायाम दिल को स्‍वस्‍थ रखने में मदद करता है। अधिक फास्टफूड, तेल-मसाले और तले-भुने खानों को खाने से बचें। इसे भी पढ़ें:- सर्दियों में दिल को दुरूस्‍त रखेंगी डॉक्‍टर की ये 5 सलाह तनाव से बचें आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण हर इंसान परेशान नजर आता है। दफ्तर हो या परिवार, इंसान किसी न किसी वजह से तनाव में घिरा रहता है। लेकिन, तनाव आपके हृदय के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं। इसलिए तनाव मुक्त रहने की कोशिश करें। तनाव से हमारा ब्लड प्रेशर प्रभावित होता है और ब्लड प्रेशर से हमारा दिल इसलिए दिल के रोगों से अगर दूर रहना है तो तनाव को छोड़ना होगा। ब्लड प्रेशर पर रखें नजर ब्लड प्रेशर दिल की परेशानियों की बड़ी वजह है। अगर आपके शरीर में खून अच्छी तरह सभी अंगों में प्रवाहित हो रहा है तो ज्यादातर रोगों की संभावना कम हो जाती है। अपने ब्लड प्रेशर को 120/80 एमएमएचजी के आसपास रखें। ब्लड प्रेशर विशेष रूप से 130/ 90 से ऊपर आपके ब्लॉकेज (अवरोध) को दुगनी रफ्तार से बढ़ाएगा। इसको कम करने के लिए खाने में नमक का कम इस्तेमाल करें और जरुरत पड़े तो हल्की दवाएं लेकर भी ब्लड प्रेशर को कम किया जा सकता है। इसे भी पढ़ें:- ब्‍लड प्रेशर बढ़ने का संकेत है ये 7 लक्षण, कभी ना करें अनदेखा वजन पर कंट्रोल रखें वजन बढ़ने से दिल की बीमारियों के साथ-साथ अन्य कई बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है इसलिए अगर आपको स्वस्थ रहना है तो अपना वजन हमेशा कंट्रोल में रखें। आपका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 से नीचे रहना चाहिए। इसकी गणना आप अपने किलोग्राम वजन को मीटर में अपने कद के स्क्वेयर के साथ घटाकर कर सकते हैं। तेल के परहेज और निम्न रेशे वाले अनाजों तथा सलादों के सेवन द्वारा आप अपने वजन को नियंत्रित कर सकते हैं। फाइबरयुक्त आहार का सेवन करें स्वस्थ हृदय के लिए फाइबरयुक्त और रेशेदार भोजन का सेवन करें। भोजन में अधिक सलाद, सब्जियों तथा फलों का प्रयोग करें। इसके अलावा ड्राई फ्रूट्स को भी रोज के आहार में शामिल कीजिए। ये आपके भोजन में रेशे और एंटी ऑक्सीडेंट्स के स्रोत हैं और एचडीएल या गुड कोलेस्ट्रोल को बढ़ाने में सहायक होते हैं। इससे आपकी पाचन क्षमता भी अच्छी बनी रहती है। ब्लड शुगर को न बढ़ने दें डायबिटीज यानि ब्लड में शुगर की मात्रा भी दिल की बीमारियों की एक बड़ी वजह है। अगर आप डायबिटीज से पीड़ित हैं तो शुगर को नियंत्रण में रखें। आपका फास्टिंग ब्लड शुगर 100 एमजी/ डीएल से नीचे होना चाहिए और खाने के दो घंटे बाद उसे 140 एमजी/ डीएल से नीचे होना चाहिए। व्यायाम, वजन में कमी, भोजन में अधिक रेशा लेकर तथा मीठे भोज्य पदार्थों से बचते हुए डायबिटीज को खतरनाक न बनने दें। अगर जरूरत परे तो हल्की दवाओं का सेवन करना चाहिए। व्यायाम भी है जरूरी हृदय रोगों का खतरा कम करने के लिए ज़रूरी है उच्च रक्तचाप, उच्च कॅालेस्ट्राल के स्तर को कम करना, जिससे गंभीर रोगों की संभावना भी कम की जा सके। स्वस्थ हृदय के लिए व्यायाम बेहद बहुत ही आवश्यक है। प्रतिदिन थोड़ी देर टहलकर भी आप अपने वजन को नियंत्रित रख हृदय को स्वस्थ रख सकते हैं। इसलिए जिम जायें, जागिंग करें और जितना हो सके चलने का प्रयास करें। ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप Read More Articles On Healthy Heart In Hindi जानिये कितना होना चाहिए आपका कोलेस्ट्रॉल और कब शुरू होती है इससे परेशानी Aug 09, 2018 QUICK BITES: रक्त में एलडीएल औसतन 70 प्रतिशत होता है।गुड कोलेस्ट्रॉल कोरोनरी हार्ट डिसीज और स्ट्रोक को रोकता है।20 साल की उम्र के बाद कोलेस्ट्रॉल का स्‍तर बढ़ना शुरू हो जाता है। आजकल की अनियमित जीवनशैली और अस्वस्थ खानपान के कारण दिल की बीमारियों की संभावना बहुत ज्यादा हो गई है। दिल की बीमारियों की एक बड़ी वजह शरीर में कोलेस्ट्रॉल का बढ़ जाना है। शरीर अच्छी तरह काम करे इसके लिए शरीर में एक निश्चित कोलेस्ट्रॉल लेवल होना चाहिए। कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ने से शरीर में कई तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं जैसे आर्टरी ब्लॉकेज, स्टोक्स, हार्ट अटैक और दिल की अन्य बीमारियां। दरअसल कोलेस्ट्रॉल वैक्स या मोम जैसा एक ऐसा पदार्थ है जो लिवर बनाता है। ये हमारे शरीर में कोशिकाओं और हार्मोन्स के निर्माण के लिए जरूरी होता है। इसके अलावा ये बाइल जूस बनाने में भी मदद करता है। आइये आपको बताते हैं कोलेस्ट्रॉल के बारे में और ये भी कि कितना कोलेस्ट्रॉल होना आपके शरीर के लिए फायदेमंद है। कोलेस्ट्रॉल एलडीएल (लो डेन्सिटी लिपोप्रोटीन) और एचडीएल (हाई डेन्सिटी लिपोप्रोटीन) कोलेस्ट्रॉल के दो प्रकार होते हैं। एलडीएल को बैड कोलेस्ट्रॉल भी कहा जाता हैं। एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को लिवर से कोशिकाओं में ले जाता है। अगर इसकी मात्रा अधिक हो जाए तो यह कोशिकाओं में हानिकारक रूप से इकट्ठा हो जाता है और धमनियों को संकरा बना देता है। इसके कारण ब्लड का सर्कुलेशन धीरे हो जाता है या रुक जाता है जिससे शरीर के अंग प्रभावित होते हैं। रक्त में एलडीएल औसतन 70 प्रतिशत होता है। जोकि कोरोनरी हार्ट डिसीजेज और स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण बनता है। एचडीएल को अच्छा (गुड) कोलेस्ट्रॉल माना जाता है। गुड कोलेस्ट्रॉल कोरोनरी हार्ट डिसीज और स्ट्रोक को रोकता है। एचडीएल, कोलेस्ट्रॉल को कोशिकाओं से वापस लिवर में ले जाता है। लिवर में जाकर यह या तो टूट जाता है या फिर व्यर्थ पदार्थों के साथ शरीर के बाहर निकाल दिया जाता है। इसे भी पढ़ें:- हार्ट अटैक से दूर रखती हैं आपकी ये 7 अच्‍छी आदतें कब बढ़ता है कोलेस्ट्रॉल 20 साल की उम्र के बाद कोलेस्ट्रॉल का स्‍तर बढ़ना शुरू हो जाता है। यह स्तर 60 से 65 वर्ष की उम्र तक महिलाओं और पुरुषों में समान रूप से बढ़ता है। मासिक धर्म शुरू होने से पहले महिलाओं में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम रहता है। मासिक धर्म के बाद पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कोलेस्ट्रॉल का लेवल अधिक रहता है। इसके अलावा कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना अनुवांशिक भी हो सकता है। देखा गया है कि अगर किसी परिवार के लोगों में अधिक कोलेस्ट्रॉल की शिकायत होती है तो अगली पीढ़ी में भी इसका लेवल बढ़ा हुआ मिलता है। सामान्य परिस्थितियों में लिवर कोलेस्ट्रॉल के निर्माण और इसके इस्तेमाल के बीच संतुलन बनाए रखता है, लेकिन कभी-कभी यह संतुलन बिगड़ भी जाता है। डायबिटीज, हाइपरटेंशन, किडनी डिजीज, लीवर डिजीज और हाइपर थाइरॉयडिज्म से पीड़ित लोगों में भी कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक पाया जाता है। महिलाओं में कोलेस्‍ट्रॉल का कम होना प्रीमैच्‍योर बेबी के जन्‍म का कारण बनता है। इसे भी पढ़ें:- कहीं आपका दिल बीमार तो नहीं, यह रहे लक्षण वयस्कों में कोलेस्ट्रॉल का स्तर रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर 3.6 मिलिमोल्स प्रति लिटर से 7.8 मिलिमोल्स प्रति लिटर के बीच में होता है। 6 मिलिमोल्स प्रति लिटर कोलेस्ट्रॉल को उच्च श्रेणी में रखा जाता है और ऐसा होने पर धमनियों से जुड़ी बीमारियों का जोखिम काफी बढ़ जाता है। 7.8 मिलिमोल्स प्रति लीटर से अधिक कोलेस्ट्रॉल बहुत उच्च कोलेस्ट्रॉल का स्तर कहा जाता है। इसका उच्च स्तर हार्ट अटैक और स्ट्रोक की आशंका को कई गुना बढ़ा देता है। कोलेस्ट्रॉल बैक्टीरिया द्वारा पैदा किए गए विषैले पदार्थों को सोखने के लिए स्पंज की तरह काम करता है। साथ ही यह मस्तिष्क की कार्यप्रणाली के लिए भी बेहद जरूरी होता है। जो लोग अल्जाइमर्स से पीड़ित होते हैं, उनके दिमाग में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक पाई जाती है। ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप Read More Articles On Healthy Heart in hindi Copyright © 2018 MMI ONLINE LTD

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